विवेकानन्द सेवा संस्थान स्वामी विवेकानन्द के मूल आदर्शो देश व समाज के प्रति उनकी मूल भावनाओं एवं विचारधाराओं से प्रेरित सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 21/1860 के अधीन पंजीकृत  शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संगठन है। संगठन की स्थापना में स्वामी जी की प्रेरणा के अतिरिक्त जन्मजात सामाजिक कार्यकर्ता मेरे अग्रज श्रीमान अशोक जी एवं मेरे परम हितैषी मित्र श्री राधेश्याम जी का विशेष योगदान रहा, जिनसे मुझे प्रोत्साहन एवं बल मिला।

इस संस्था की स्थापना दिनांक 04.09.1985 ई0 को समाज के कमजोर वर्ग पिछड़े असहाय गरीबों, दुखियों एवं बेसहारा तथा विकलांग लोगों की हर सम्भव सहायता करने के पुनीत उद्देश्य को लेकर हुई थी, जो प्रारम्भ में जनपद स्तर सीतापुर से प्रारम्भ होकर आज अखिल भारतीय स्तर पर समाज जीवन से जुड़े अन्यान्य क्षेत्रों में सेवारत है। संस्थान के समर्पित कार्यकर्ता देश व समाज की सेवा के लिए नगरों से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों में भी अपने सामाजिक दायित्वों का समुचित निर्वहन कर रहे है वह चाहे गरीबों की सेवा की बात हो असहाय बच्चों की पढ़ाई की बात हो, चाहे गुजरात का भूकम्प हो, बाढ़ या सूखा राहत की बात हो संस्था ने सभी में यथा संम्भव योगदान किया है। संस्था ने दिनांक 04.09.2015 को अपनी स्थापना के 30 वर्ष सफलता सम्भव पूर्वक पूर्ण किये हं ।

लक्ष्य:

स्वामी विवेकानन्द के सपनों का भारत निर्माण करने हेतु नवयुवकों का आहवान कर उनमें सोई हुई तरुणाई को जागृत करना उन्हें आत्म निर्भर बनाना और ऐसे समर्पित प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं के माध्यम से समस्त भारत के सुदूर ग्रामीण अंचलों तक समाज सेवा के प्रमुख आयाम जो संस्था की सोच में है कि वस्त्रहीनों को वस्त्र तथा असहाय बृद्ध एवं विकलांग जनों को सहारा देना, अशिक्षित, निराश्रित बच्चों को शिक्षित एवं संस्कारित कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ना और ऐसे ही रचनात्मक कार्यक्रमों के द्वारा देश में आर्थिक सामाजिक एवं शैक्षिक परिवर्तन लाकर सुदृढ़, शुशिक्षित, आत्मनिर्भर, खुशहाल, सम्पन्न एवं भव्य भारत तथा दूसरे अर्थो में स्वामी विवेकानन्द के सपनों का भारत निर्माण करना संस्था का प्रमुख लक्ष्य है।